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HAPPY BIRTHDAY "GREAT RAFI SAHAB"..(24 December 1924 – 31 July 1980)

कमो बैस एक सदी पहले ... कोटला सुल्तान सिंह तालुका मजिथा  " 24 दिसंबर 1924 दिन बुधवार " की सर्द रात... सुबह सादिक से कुछ पहले सफेद बालो वाली दाई "कम्मो" की आवाज़  आती है " अल्लाह के करम से इस बार भी लड़का ही हुआ है अल्लाह रक्खी " बच्चे को माँ की गोद मैं देती है कुछ देर बाद  दाई हाजी अली मुहम्मद साहब  को बच्चे का चेहरा दिखाती है जो बहार खड़े इस खबर का इंतज़ार कर रहे थे हाजी अली मुहम्मद साहब  दाई कम्मो को दो सैर गेहूं,.... गुड़, नये कपड़े और कुछ सिक्के देते हैं बच्चे का नाम मुहम्मद रफ़ी ( The Exalted one) रखा जाता है
दोस्तों यही मासूम बच्चे आगे चल कर "दी ग्रेट मुहम्मद रफ़ी साहब" बने  जो की आज लाखों नहीं करोड़ों लोगो के दिलों पर राज़ करते हैं

 दोस्तों वैसे ये बात ज्यादा मायने नहीं रखती के कौन कब पैदा हुआ और कब दुनिया से रुखसत हो गया बल्कि ये बात मायने रखती हैं की जिंदगी किन उसूलो पर गुजारी -और रुखसत होने के बाद भी लोग उन की ज़िन्दगी से किस कदर फ़ैज़याब हो रहे हैं
रफ़ी साहब समाजी हम अहंगी (सामाजिक एकता ) की सब से बड़ी अलामत हैं रफ़ी साहब की अहमियत ये ही नहीं की उन्होंने बड़े पैमाने पर नग़्मात गाये बल्कि उन्होंने ज़िन्दगी के हर पहलू के इज़हार का जरिया दिया है अपने नग़्मात से ,खास अहमियत इस लिए भी है की वह समाजि , मजहबी , नस्लीफजिर , इंसानियत , इंसानी अक़दार , कौमियत ,अलवतनी , सेक्युलर अज़्म ,और फिरका वरना हमदर्दी की मजबूत अलामत भी हैं
आज जब इखलाकी ,समाजी, जज़्बातिकदर मजहबी यकज़ेहदी के कमी दौर है तो रफ़ी साहब के गीत इंसानियत , इंसानी रिश्तों और समाजी हम आहंगी के लिए पुरज़ोर हौसला अफ़ज़ाई करते हैं इत्तेहाद और सलामती मजबूत करने मैं आज के वक़्त की जरुरत हैं
रफ़ी साहब उन के फैंस के लिए ही नहीं हर एक शख्स के लिए समाजी हिस्सेदारी कायम करने का बेहतरीन असबाब है लेकिन अफ़सोस हुकूमतों ने उन को बड़े पैमाने पर नज़र अंदाज़ किया हुकूमतें इन सब बातों पर कभी गौर ही नहीं करती हैं रफ़ी साहब को उन की कारकर्दगी के सिला अभी तक मौसूल नहीं हुआ वैसे तो रफ़ी साहब हम सब के लिए आलमी गौहर हैं पर क्या ही खूब हो जो हमारी सरकार भी उन को भारत रतन से नवाजे सभी रफीअन सरकार के तहे दिल से शुक्रगुज़ार होंगे
                       
   
                          शाहिद खाँ जयपुरी

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